पालीताना चैत्यवंदन विधि के मुख्य नियम (Key Rules of Chaityavandan)
शांति जिनेश्वर सोलमा, अचिरा सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणी, भविजन सुख कंदो।मृग लांछन जिन आयुखूं, लाख वरस प्रमाण;हत्थिनापुर नगरी धणी, प्रभुजी गुण मणिखाण।
आदिेश्वर जिनरायनी, गणधर गुणवंत;प्रगट नाम पुंडरीक जस, महिमाए महंत।पांच कोडी मुनिंद साथ, अणसण तीहां कीध;शुक्ल ध्यान ध्याता अमल, केवल वर लीध।चैत्री पूनमने दिने ए, पाम्या पद महानंद;तेहना चरण कमले नमी, लहीए परमानंद। palitana 5 chaityavandan in hindi full
- द्वितीय चैत्यवंदन
४. श्री पुंडरीक स्वामी चैत्यवंदन (Fourth Chaityavandan of Shree Pundarik Swami) अचिरा सुत वंदो
- प्रथम चैत्यवंदन
Shree Shantrunjay giriraj Yatra Five Chaityavandans - jainsite विश्वसेन कुल नभोमणी
पालीताना गिरिराज की तलहटी में प्रवेश करते ही सबसे पहला चैत्यवंदन पर किया जाता है। यह तीर्थ के प्रति समर्पण का प्रतीक है। चैत्यवंदन मूल पाठ: